" ध्यान अनुभव "

 

2008 में मेरे मित्र आर. पी. पाण्डेय ने ध्यान के बारे में बताया। उस समय मैं काफी परेशान था। मानसिक परेशानी के साथ - साथ शारीरिक रूप से भी अस्वस्थ चल रहा था। फिर मैंने ‘ध्यान’ शुरू किया। उसके बाद दवा भी अपना काम तेजी के साथ करने लगी। मैं स्वस्थ हो गया। काम करने की शक्ति के साथ - साथ मेरी मानसिक शक्ति की भी काफी बढ़ोतरी हुई।

 

ध्यान करने से मेरा काम करने में मन लगने लगा, कार्य क्षमता बढ़ गई। कार्य करने में आनन्द प्राप्त होने लगा। हर काम में सफलता मिलने लगी। मन तनाव मुक्त रहने लगा। हर तरफ खुशी ही खुशी नज़र आने लगी। ध्यान करते वक्त विभिन्न प्रकार के मेरे अनुभव इस प्रकार हैं:- 

 

1. मैं पहाड़ की तराई में घूम रहा हूँ। पर्वत शृंखलाओं पर बर्फ पड़ी हुई है। मैं इतना घूमा कि मुझे पसीना आ गया। मैं खुश था। ‘ध्यान’ के इस अनुभव द्वारा मुझे आंतरिक प्रसन्नता मिली।

 

2. मैं अपने मित्र के साथ एक नदी के किनारे पर टहल रहा हूँ। नदी पानी से पूरी तरह से भरी हुई है। हम दोनों वहाँ पर नदी के किनारे बैठ गए। अचानक हम दोनों को दिखा कि उस जगह पृथ्वी फट गई। एक देवी स्वरूप माता अन्दर की ओर जा रही है। मैंने अपने मित्र से पूछा तो उसने मुझे बताया कि वह देवी स्वरूप कोई और नहीं, सीता जी हैं।

 

3. एक बार मैं रात्रि में ध्यान करने बैठ गया। कब 1:30 बज गए पता नहीं चला तभी मैंने अनुभव किया कि मैं जमीन से ऊपर उठ रहा हूँ। मेरा ध्यान टूट गया और मैंने अपने शरीर में एक जबरदस्त झटके का अनुभव किया।

 

4. एक बार मैं ध्यान में बैठा तो मुझे AME का प्रश्‍न पत्र सामने दिखाई पड़ा। सभी प्रश्‍नों को मैं हल करने लगा। परीक्षा से पहले ही प्रश्‍न पत्र ध्यान के माध्यम से दिख जाने के कारण से मैं खुश था और मुझे उस परीक्षा में 80% अंक भी प्राप्त हुए।

 

5. एक बार मैं ध्यान में बैठा था। उस समय मैंने देखा कि एक ट्रक सामान से भरा हुआ रूका। उसमें से लोग सामान उतार रहे थे। सामान इधर - उधर फेंक रहे थे। मैंने उन लोगों से आग्रह किया कि सामान को आराम से उतारें तो उनके सामान का नुकसान नहीं होगा और काम भी जल्दी पूरा हो जाएगा। वे लोग मान गए और काफी खुश हुए।

 

मेरे विचार से ध्यान करने से लाभ ही लाभ है। हमारे काम करने की क्षमता के साथ - साथ एकाग्रता भी बढ़ती है। जिससे ज़िन्दगी में आगे सफलता के साथ उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

 

धीरज रंजन
चण्डीगढ़

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