" ध्यान सिखाना अब मेरे जीवन का उद्देश्य है "

 

मेरा नाम कुलविन्दर सिंह मेहता है। मै पश्चिम दिल्ली स्थित वीरेन्द्र नगर का निवासी हूँ। मैं एक व्यवसायी हूँ और सिक्ख धर्म से हूँ पर कट्‌टरवादी नहीं हूँ। मैं एक स्वतंत्र विचारों का इंसान हूँ और हर धर्म का सम्मान करता हूँ। 

 

मेरा जन्म बिहार के गया में हुआ और ‘बोध गया’, जहाँ महात्मा बुध्द को ज्ञान प्राप्त हुआ था, मेरे जन्म स्थान से 3 घण्टे के सफ़र के बाद आता है। वहाँ जाना तो कई बार हुआ। देखा, भिक्षु लोग चुपचाप बैठ कर ध्यान करते हैं पर यह ध्यान क्या है, इस ओर न कभी ध्यान दिया न ही कभी यह समझा कि इससे मिलता क्या है। दिल्ली आने के बाद सीनियर पिरामिड मास्टर जसविन्दर मैडम से ध्यान संबंधी जानकारी मिली। एक ध्यान क्लास उनके घर पर थी, मुझे पता लगा। मुझे लगा अन्य संस्थाओं की तरह यह भी किसी संस्था का कोई कार्यक्रम है, बाद में ज़रूर कोई पैसा इक्ट्‌ठा करने को कहेंगे, परंतु वहाँ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। ध्यान करने के बाद बहुत ताज़गी महसूस हुई, मन को शांति मिली और पता चला कि वे भिक्षु बैठ कर क्या पाया करते हैं। उसके बाद मैने इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। 

 

हम सबने यह सोचा कि एक ऐसी जगह खोजी जाए जहाँ सबको मेडिटेशन के बारे में बताया जाए। हमने शिवनगर में एक कमरे का प्रबंध किया और वहाँ सबको ध्यान सिखाना शुरू कर दिया। तब से मुझे लगता है ऊर्जा व स्वास्थ्य निरंतर मेरे पास रहते हैं। मुझे हर काम में सफलता मिलती है, मन प्रसन्न रहता है। यह ध्यान प्रचार का कार्य हमने राजौरी गार्डन से शुरू किया और अब पूरे पश्चिमी दिल्ली में यह फैल चका है। तिलक नगर के कत्याल मंदिर में कई बार कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके है जहाँ सीनियर पिरामिड मास्टर्स ने अपना ज्ञान बाँटा है। 

 

ध्यान करने से मुझे अपने स्वास्थ्य में काफी सुधार नज़र आया है। मुझे ब्लड प्रेशर व मधुमेह भी था पर बिना किसी दवाई के सिर्फ ध्यान के द्वारा मुझे इनसे छुटकारा मिला है। मुझे जब भी कोई परेशानी होती है, ध्यान में उसका समाधान मिल जाता है। मेरे एक सहयोगी का मोबइल फोन तकनीक खराबी के कारण चलना बन्द हो गया था। ऑफिस में पिरामिड कैप के नीचे थोडे दिन उसे रख दिया और जब निकाला तो वह चल पड़ा। इसे चमत्कार कहें तो अत्युक्ति न होगी। 

 

हमने ध्यान प्रचार के लिए स्कूलों व अन्य संस्थाओं से सम्पर्क किया और वहाँ ध्यान सिखाया। पूर्णिमा की रात सभी ध्यानी मिलकर किसी एक निश्चित जगह पर ध्यान करते हैं जिसमें बहुत आनन्द आता है। इसी प्रकार सीनियर पिरामिड मास्टर्स अलग-अलग विषयों पर वर्कशाप का आयोजन भी करते रहते हैं। पिछले दिनों प्रेमनाथ सर ने astral surgery की वर्कशाप आयोजित की जिसमें कई लोगों ने स्वास्थ्य-लाभ प्राप्त किया। जब ब्रह्मर्षि पत्री जी दिल्ली आते हैं तो उनके कई प्रोग्राम होते हैं। पिछले दिनों ऐसे ही एक प्रोग्राम में बच्चों ने बढ़-बढ़ कर भाग लिया और पत्री सर के संदेशों को बड़े रोचक ढंग से सब तक पहुँचाया। 

 

सितम्बर-अक्टूबर 2012 में पिरामिड वैली में आयोजित ग्लोबल कांग्रेस में जाने का सुअवसर मुझे मिला, जहाँ देश-विदेश के अनेक आध्यात्मिक वैज्ञानिक भाग ले रहे थे। वहाँ कई अनुभव हुए। पिरामिड में इतनी ऊर्जा है कि तुरन्त ही मैं विचार हीनता की अवस्था में पहुँच गया। वहाँ किंग्ज़ चेम्बर में थी ध्यान करने का मौका मिला। निश्चित ही पिरामिड वैली जा पाना एक सौभाग्य की बात है। वहाँ ब्रह्मर्षि पत्री के साथ वक्त गुज़ारने और उनसे बात-चीत करने का भी अवसर मिला। उन्होंने यही सन्देश दिया कि खुद भी ध्यान करो, दूसरों को भी करना सिखाओ। यहाँ आकर मुझे अपने कुछ प्रशनों के उत्तर मिल गए। मैं सोचता था मैं हूँ कौन और क्यों धरती पर आया हूँ। मुझे पता लगा कि जिस प्रकार फूल अपनी सुगन्ध बिना किसी भेदभाव के सबको बाँटता है, उसी प्रकार मुझे भी सभी के साथ हँसी खुशी रहना है, चाहे वे लोग कैसे भी हों। 

 

ध्यान से मुझे कई लाभ हुए। सर्वप्रथम तो मेरे नकारत्मक विचार बंद हुए। धीरे-धीरे मैने माँसाहार छोड़ दिया और शुध्द शाकाहारी बन गया। मेरा स्वभाव भी अब शांत हो गया है। सबसे बड़ा परिवर्तन तो यह हुआ था कि मुझे आत्मनिर्भर होने का संदेश मिला। इस संदेश को मैने जीवन में उतार लिया है। मेरा छोटा बेटा मनमीत भी अब ध्यान करता है और वह भी वेजिटेरियन हो गया है। मेरा जीवन अब हर प्रकार से आनंदपूर्ण है। यह ध्यानमार्ग ही वास्तव में आनंदमार्ग है। मैं सबसे यही कहूँगा कि ध्यान तो करें ही, इसका अपने क्षेत्र में प्रचार भी करें और आनंदलोक में जीवन व्यतीत करें।

 

कुलविन्दर सिंह मेहता
दिल्ली
                                    संपर्क : +91 9971848073, 011-65651820

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