" ध्यान ही एक मात्र मार्ग है "

 

मैं ललिता पटेल नागपुर निवासी हूँ।

 

मेरे पिताजी के घर नित्य साधु-संतों का आना-जाना रहता था। जिससे मुझे बचपन से ही भक्ति मार्ग एवं अध्यात्म मार्ग के विषय में बहुत जिज्ञासा उत्पन्न हुई थी और इस जिज्ञासा वश मैंने बचपन से ही इस मार्ग की ओर चलने का अभ्यास शुरू कर दिया था।

 

मेरी शादी के बाद पति भी अध्यात्म मार्ग में मेरे साथ हम राही होने से, अध्यात्म मार्ग में चलना मेरे लिए सरल हो गया। हम दोनों हमारे गुरुजी के मार्ग दर्शन में नित्य ध्यान साधना का अभ्यास करते रहते हैं। यहाँ नागपुर में स्थित गुरुजी के आश्रम में हम सभी साधकगण नित्य ध्यान साधना करते रहते हैं।

 

पिछले दिनों की बात हैं। उस दिन श्री पत्रीजी हमारे आश्रम आने वाले थे और हम सभी साधकगण श्री पत्रीजी का ध्यान साधना करते हुए इंतजार कर रहे थे। कुछ ही समय में श्री पत्रीजी का आगमन हुआ। उनको देखकर मैं बहुत ही अभिभूत हो गई। उनकी वह दिव्य, सौम्य एवं शांत मूर्ति मेरी हृदय पटल पर आज भी अंकित हैं। उनके चेहरे पर तेजस्वी ऊर्जा-प्रकाश सहज ही देखा जा सकता था।

 

श्री पत्रीजी ने आते ही हमें सत्संग-लाभ दिया। तत्पश्‍चात उन्होंने आनापानसति ध्यान के विषय में संक्षेप में समझा कर सभी साधकगण को ध्यान का अभ्यास कराया। अभ्यास के दौरान उन्होंने बाँसुरी वादन किया। उनका बाँसुरी वादन इतना अद्भुत था कि उनकी बाँसुरी के सुर आज भी मेरे कान में गूँज रहे हैं। आनापानसति ध्यान इतना सहज था कि मैं जल्दी ही गहरे ध्यान में लीन हो गई। लगभग 45 मिनट तक मैं गहरे ध्यान में ध्यानस्त रही। ध्यान में मुझे परम आनंद की अनुभूति हुई। मैं जैसे हवा में उड रही थी और इस संसार में मैं सबसे सुखी व्यक्ति हूँ ऐसा मुझे प्रतीत हो रहा था। श्री पत्रीजी की सहजता एवं दिव्यता वश मानो वहाँ का पूर्ण श्री परिसर सजीव एवं ओजस्वी हो उठा था।

 

सचमुच, उस अदभुत्‌ अनुभूति के लिए मैं श्री पत्रीजी की सदा ऋणी रहूँगी। उस दिन आश्रम में मेरी मुलाकात श्री जनार्दनजी नायडु से भी हुई जो श्री पत्रीजी के साथ वहां आए हुए थे। आध्यात्मिक मार्ग के विषय में मुझे श्री जनार्दनजी से आज भी नित्य मार्ग दर्शन प्राप्त होता रहता हैं।

 

कुछ दिनों पश्‍चात मेरा हैदराबाद जाना हुआ। वहाँ बाग अंबरपेट स्थित एन.सतीश द्वारा संचालित ‘स्पिरिच्‍युअल इंडिया’ केन्द्र से मैंने ‘स्पिरिचुअल रियालिटी’ नामक vcd देख मेरा मानना है कि इसे प्रत्येक ध्यान साधना मार्ग पर चलने वाले साधक को देखनी चाहिए। इस में ध्यान मार्ग के अद्‌भुत रहस्यों का सुंदरता से चित्रण किया गया हैं।

 

श्री पत्रीजी की मुलाकात ने मेरे जीवन में बहुत ही अमिट छाप छोड़ी हैं और इससे मुझे साधना पथ पर चलने में बहुत दृढ़ता प्राप्त हुई हैं। इसीलिए मुझे लगता है ध्यान ही एक मात्र मार्ग हैं।

 

ललिता नटवर पटेल
नागपुर 

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