" ध्यान के चमत्कार "

 

मेरा नाम मंजुनाथ (28) है। मैं बल्लारी, कर्नाटक का रहने वाला हूँ। दस साल पहले मैं पी.एस.एस.एम से जुड़ा। उस समय मैं कई परेशानियों तथा बीमारियों से घिरा था। शुरू में कुछ खास फ़ायदा नहीं हुआ पर इस सोसाइटी से जुड़ने के डेढ़ साल बाद जब मैंने मांसाहार पूरी तरह छोड़ दिया तो अभूतपूर्व परिणाम सामने आने लगे। मुझे लगा मैं दानव से मानव तो बन गया हूँ और अब मानव से देवता बन रहा हूँ। स्वास्थ्य अच्छा होने लगा, मेरी सोच सकारात्मक होने लगी। मानसिक शांति मिली और पढ़ाई भी अच्छी होने लगी।

 

यद्यपि मैंने विज्ञान की शिक्षा नहीं ली है पर ध्यान में आने के बाद मैंने बेंगलौर में नेटवर्किंग में हाईवेयर का काम सीखना शुरु किया तो सारी बातें सरलता से समझ आने लगीं। मैंने डेढ़ साल तक नेटवर्क इंजीनियर के तौर पर काम किया। इसके साथ ही हर शनिवार व रविवार को पिरामिड वैली में स्वैच्छिक सेवा के लिए जाता रहा। इन दिनों मैं विभिन्न प्रदेशों से आने वाले विभिन्न भाषा-भाषियों को ध्यान करना सिखाता हूँ। मेरे समझाने के ढंग में भी उत्तरोत्तर विकास हो रहा है। मुझे खुशी है कि ध्यान जगत की रचना में मेरा भी योगदान है। मुझे सबसे ज़्यादा खुशी तो इस बात की है कि मैं एक ऐसे सद्‌गुरु के साथ हूँ जिसे धन, मान आदि से कुछ वास्ता नहीं है। उनकी इच्छा तो यह है कि सब ब्रह्मर्षि बनें। उनकी सोच को अपनी सोच बना लें तो ऐसा संभव है। पिछले ध्यान यज्ञों और बुध्द पूर्णिमा में मैंने अपनी सेवाएँ दी हैं और बल्लारी के आसपास के साठ गाँवों में ध्यान प्रचार किया है। दो साल के लिए मैंने अपना जॉब छोड़ा है। पहले ध्यान जगत का निर्माण, बाकी सब काम उसके बाद। यह पूरा समय अब ध्यान प्रचार को समर्पित है।

 

 

मंजुनाथ
बल्लारी
 

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