" मधुर संगीत बन गई "

 

मेरा नाम मिथलेश सक्सैना है, मैं दिल्ली ग्रेटर कैलाश में रहती हूँ। पिछले ढाई सालों से ध्यान कर रही हूँ। मैं सत्संग में जाती थी। वही सीनियर पिरामिड मास्टर आशा गुप्ता जी ने आनापानसति विधि से ध्यान करना सिखाया। मैंने नियमित रूप से ध्यान करना शुरू किया। फॉरगिवनेस मेडिटेशन और पिरामिड मेडिटेशन बहुत शक्तिशाली विधियाँ है। जिससे जीवन के आंतरिक स्तर पर बहुत शक्तिशाली बदलाव आए। विचारों में सकारात्मकता, आन्तरिक पवित्रता और सहजता का एहसास होने लगा। हृदय के बहुत से जंग लगे लौह द्वार खुलने लगे जिससे मन को बड़ी शांति मिली। 

 

पिरामिड मेडिटेशन आरंभ करने के 5-6 दिन पश्चात ही मधुर संगीत सुनाई देने लगा जो 24 घंटे रात-दिन जब भी नींद से आँखे कुलती संगीत चल रहा होता। लगता मानो भरी महफिल में बड़े दिल से मस्ती से कोई गा रहा है। यह संगीत मेरे दिल को अंदर तक छूता है, मन में कोई हलचल नहीं है। मैंने घर में पिरामिड लगवाया और कई पिरामिड़ों को उपहार रूप से सबको दिया। मेरे मन में प्रश्न उठा कि यह संगीत कहाँ से आता है, दूसरे ही दिन एक आध्यात्मिक पत्रिका में इसके बारे में पूरा विवरण था कि भौतिक जगत के अलावा भी अन्य मंडल है, यह हमारी आत्मा की उड़ान है जो अनुभव करता है वहीं जान सकता है। 

 

ध्यान साधना द्वारा हम अपनी आत्मा के साथ प्रयोग करते है लेकिन इस क्षेत्र में हमारा शरीर ही प्रयोगशाला बन जाता है। इससे उस परमसत्ता से अपना संबंध अनुभव होता है। हम अन्तर के मण्डलों की यात्रा करते हैं तो यह अनुभव ही सबसे बड़ा शास्त्र है। 

 

अधिकतर ध्यान में बैठते समय श्वेत प्रकाश दिखता था जहाँ जमीन, आसमान, बादल, नदी, मानस और पक्षी सभी श्वेत प्रकाश में दिखते है। ध्यान द्वारा ही उस सूक्ष्म जगत के साथ हमारा सम्पर्क स्थापित होता है, रंग और प्रकाश दिखते है। यह कोई चमत्कार नहीं। 

 

मैं अपने प्रश्नों के उत्तर पाकर खुशी से आत्मविभोर हो क्योंकि यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि हैं। आशा जी का धन्यवाद करती हूँ।

 

 

                                                             मिथलेश सक्सैन
 दिल्ली 

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