" ध्यान के चमत्कार "

 

मेरा नाम पद्मा है। मैं एक गृहिणी हूँ, सिकन्दराबाद में रहती हूँ। पाँच साल पहले मेरा परिवार कई तरह की परेशानियों से घिरा था। मैंने हिप्नोटिज़्म का सहारा लिया, कई गुरूओं से दीक्षा ली पर परेशानी खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। एक दिन मेरी दीदी ने मुझे पिरामिड स्परिचुअल सोसाइटी के बार में बताया और कहा कि वहाँ जाने से तुम्हारी समस्या का हाल तुम्हें ज़रूर मिल जाएगा। बताए स्थान पर जाने से मुझे राजशेखर सर मिले। मैं बहुत रोई और उन्हें अपनी समस्या के बारे में बताया। उन्होंने मुझे ध्यान करना सिखाया और कहा कि रोज़ एक घंटा ध्यान करो।

 

घर के हालात ऎसे थे कि मुश्किल से एक वक्त का खाना खा पाते थे। समझ नहीं आ रहा था कि मेरी बेटी इण्टर की परीक्षा कैसे दे पाएगी। मैंने और परिवार के सभी सदस्यों ने 41 दिन तक रोज़ एक घंटा ध्यान किया, मैं तो कई बार 5 घ्ण्टे या उससे ज्यादा भी ध्यान में बैठी रहती थी। ध्यान में बिताया समय सुख देता था। 41 दिन के बाद मुझे अन्दर से प्रेरणा मिली कि मुझे ध्यान-प्रचार करना चाहिए। मैं PYMA के प्रेज़िडेंट प्रदीप जी से मिली। मेरी बेटी सौम्या और मुझे दोनों को ही ध्यान में समय बिताना बहुत सुखकर लगता था।

 

41 दिन बीतने पर अचानक लोगों ने पैसा इकट्ठा करके मुझे एक लाख रूपए दिए। मेरी विपदा दूर होने लगी। अब मुझे किराए के रूप में 5000 रू. महीने की निश्चित आय भी होने लगी। अब तो मुझे हर महीने चालीस हज़ार रूपए किराए के तौर पर मिलते हैं जो किसी चमत्कार से कम नहीं हैं। ऎसा नहीं कि अब समस्याएँ नहीं आतीं पर अब मैं उन्हें मुस्कुराते हुए झेल जाती हूँ। मैं अनपढ़ हूँ। पत्रीजी की पिरामिड पार्टी आँफ़ इणिडया के लिए मैंने कैंपेनिंग भी किया है। लाखों पेम्फ़्लेट बाँटे हैं| मांसाहार का विरोध और शाकाहार क प्रचार किया है। इससे शरीर व मन दोनों स्वस्थ रहते हैं मैं अपने बच्चों को PYMA में काम करने के लिए प्रेरणा व सहयोग रहती हूँ। मैं मंदिरों, स्कूल, काँलेजों तथा घरों में जाकर ध्यान प्रचार करती हूँ। मैं हर मिलने वाले को ध्यान करने की सलाह देती हूँ – ' घर में सुख शांन्ति रहेगी, ध्यान करो। बच्चे को जन्मदिन पर ध्यान का उपहार दो। मेरा पास कोई धन नहीं था पर मैं ईजिप्ट के गीजा पिरामिड देखकर आई हूँ, मेरी बेटी अब डेंट्ल काँलेज में पढ़ रही है। स्वास्थ्य अच्छा है,कभी कोई दवा नहीं लेना पड़ती, इसलिए कहती हूँ सब ध्यान करें।

 

मैंने काँलेज में ध्यान सभा का आयोजन किया था जिसमें पत्री सर ने दो हज़ार लोगों को संबोधित किया था और मुझे उसके लिए एक भी पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। मुझे खुशी है आज मेरे घर में ' ध्यान जगत ' का ऑफिस खुला है जिसे प्रदीप जी संभालते हैं। 2012 तक यह पूरा विश्व ध्यान जगत हो जाएगा, ऐसा मुझे लगता है और मुझे खुशी है कि ऐसा हो रहा है। मैं चाहती हूँ जिस ज़मीन पर हम रहें उसे ध्यान की शक्ति से पवित्र करके हम खुश होकर रहें। मैं हर तरह से प्रसन्न और स्वस्थ हूँ। जो चाहती हूँ, वह सब पूरा हो जाता है। यह सब पत्री जी के कारण ही हो पाया है। उन्हें शत शत प्रणाम।

 

पद्मा
सिकन्दराबाद
फोन : +91 9290673690

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