" मैंने शाकाहार को अपनाया "

 

मेरा नाम मार्टिन प्लास्तरे है, मैं फ्रांस में रहती हूँ। मैं 55 वर्ष की फ्रेंच महिला हूँ और पिछले 35 वर्षों से शाकाहारी हूँ। मेरा जन्म एक ईसाई परिवार में हुआ। मेरे मम्मी और पापा 5 भाई बहिनों के साथ रहते थे। 17 वर्ष की उम्र में मैंने नर्स बनने का सोचा, पता नहीं क्यों मैं कसाई घर स्कूल के साथ एक पिकनिक पर प्रेमपूर्वक गई। उस दिन बहुत सर गाय कटने के लिए लाईन में थी। बारी-बारी सभी आ रही थी और अंतिम कटने के साथ उनकी दर्दनाक आवाज आ रही थी। "हम्प" कटने के एक टाँग से लटका दिया जाता और सारा खून बह जाता। वे लोग हमें अलग-अलग पशुओं का काटने का तरीका दिखा रहे थे। 

 

उधर गायों की लाइन थी और मैं बच्चों की लाई में पहले नम्बर पर खड़ी थी अचानक मेरी आँखे और गाय की आँखे आपस में मिली, ऐसा समझिये आँख का आँख से मिलना, आत्मिक मिलन और गाय का डर, दर्द और पीड़ा जैसे मैंने महसूस किया। उस महत्वपूर्ण पल में मैंने माँसाहार का पूर्णतया त्याग कर दिया, नहीं, कभी नहीं। 

 

9 वर्ष पश्चात्‌ मैं भारत आई "भारत" जहाँ गाय को पूजा जाता है, गाय को माँ समझा जाता है। मेरी भारत यात्रा के समय मुझे लगा कि मैं आत्मा से अपने घर आ गई हूँ। मुझे हर जगह शाकाहारी भोजनालय मिल जाते थे। मुझे लगा मैं दूसरे लोक में हूँ। 

 

आज सारी मानव जाति का पेट शाकाहार भोजन से भरा जा सकता है। 

 

इंसान तू कहाँ सो रहा है, तू कब अपना दिल के दरवाजे खोलेगा, मेरे कानों में इन बेजुबान जानरों की चीखें सुनाई नहीं देती। जल्दी सुन..सुन..सुन 

 

जय एकता, जय गौ माता 

                                                 

   मार्टिन प्लास्तरे
फ्रांस

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