पाइमा के कुछ सदस्यों से एक भेंटवार्ता

 

मेरा नाम रवि किरण है। मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ और बैंक ऑफ़ अमेरिका में कार्यरत हूँ। पिछले तीन वर्ष से पी.एस.एस.एम. से जुड़ा हूँ। इससे पहले मैं स्वीडन में था परन्तु अपने जॉब तथा परिवार के बीच तालमेल न बिठा पाने के कारण तनावग्रस्त हो गया। डिप्रेशन भी हो जाता था। मेरी मित्र प्राणहिता से जब भी बात होती या वह मुझे ई-मेल लिखती, हमेशा ध्यान करने को कहती। मैं वहाँ दो अन्य लोगों के साथ रह रहा था इसलिए लगता था कि यह सब करना मेरे लिए सम्भव नहीं होगा। दो महीने गुज़र गए और वे दोनों ही चले गए| तब मैंने ध्यान करना शुरू किया। इससे पहले भी मैं कई विधियाँ सीखी थीं पर मुझे कभी कोई लाभ नहीं हुआ था। इस बार प्राणहिता कहने पर मैनें नियमित रूप से ध्यान किया। आनापानसति ध्यान का तरीका सरल है पर काफी असरदार है। मुझे भी लगने लगा अब मैं तनाव व डिप्रेशन से बाहर आ रहा हूँ। आँफिस आते और जाते समय ट्रेन में दस मिनट ध्यान करने लगा। एक महीने में ही मैंने अपने अन्दर एक सकारात्मक परिवर्तन देखा। मांस और मदिरा का सेवन बन्द हो गया। मन शांत रहने लगा। मेरे भीतर आत्म-विश्‍वास बढ़ने लगा।

 

कुछ ही समय में मैंने कांफ्रेंसों में भाग लेना शुरू कर दिया| जहाँ मैं पहले कभी नहीं जाता था, आत्मविश्‍वासपूर्वक काम करने से मेरा काम बेहतर होने लगा, प्रमोशन हुआ, अवार्ड मिले, वेतन भी बढ़ गया, लोगों से मिलने जुलने लगा। मेरी विचारशक्ति (thought power) बढ़ गई। अब मैं जो भी कुछ सोचता, वह मेरे जीवन में घटित होने लगा। भारत लौट आया। कई अलग अलग जगह जॉब किया पर बंगलौर में रहने का भी मौका मिला। वहाँ weekend पर मैं पिरामिड वैली जाया करता था। एक दिन विचार आया कि गाँव में जो घर है वहाँ बहुत जगह है, वहाँ पिरामिड मेडिटेशन सेंटर बनाना है। मैंने गाँव में अपने भाई को फ़ोन लगाया तो मेरे कुछ भी कहने से पहले उसी ने कह दिया कि वह घर में पिरामिड मेडिटेशन सेंटर बना रहा है। मैं हैरान रह गया। ऑफ़िस में भी सब खुश थे, जीवन ही बदल गया।

 

मैं कंपनी बदलना चाहता था, पुणे जाने का मन भी था। एक सप्ताह में ही अधिक वेतन और उच्च पद पर पूणे में नौकरी मिल गई। हैरानी की बात है क्योंकि यह मंदी का समय था। फिर मैंने चाहा हैदराबाद चला जाऊँ, वह भी हो गया। वेतन भी बढ़ गया था। मैंने सोचा था कि मैं कुछ समय के बाद विदेश जाऊँगा। पैसा होगा तो गाड़ी खारीदूँगा, पिरामिड बनवाऊँगा, नाम कमाऊँगा। जल्दी ही मुझे अच्छे काम की वजह से Global Recognition Award  मिला। विदेश जाने का रास्ता खुल गया पर कम्पनी एक महीने के लिए बाहर भेजती थी। मेरी इच्छा थी कि अगर ज्यादा समय यहाँ रह सकूँ तो पैसे बिचाकर पिरामिड बनवना है। और देखिए – मुझे दो महीने के लिए वहाँ रहने की अनुमति मिली। ऐसा अक्सर होता नहीं पर यह है miraculous thinking  का असर।

 

पिछ्ले ध्यानमहायज्ञ में मैंने सोचा था कि अगले ध्यानमहायज्ञ में मैं अपनी कार से जाऊँगा और इस बार मैं अपनी ही कार में आया हूँ। मेरी सब छोटी-छोटी इच्छाएँ भी पूरी हुई हैं और बड़ी इच्छाएँ भी जैसे पिरामिड का बनना, परिवार के सदस्यों का ध्यान से जुड़ना, मेरे गाँव में ध्यान का फैलना। मेरे गाँव से कई लोग इस बार ध्यान चक्रम् में आए हैं। एक व्यक्ति तो आत्महत्या करने पर उतारू था पर आज यहाँ आया है, मेरे लिए यह आनन्द का विषय है।

 

पाइमा के सदस्य के रूप में मैं प्राणहिता के साथ कई जगह जाकर ध्यान की क्लास लेता हूँ। निजी तौर पर भी मैंने अमेरिका के न्यूजर्सी में तेलुगु समाज में जाकर कई बार ध्यान की क्लास लगाई है।

 

रवि किरण
संपर्क : +91 9640151890 

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