" ध्यान से अपने आप को पहचाना "

 

 

मैं शीला प्रेम खुंगर हूँ| मेरी उम्र इस वक्त 50 वर्ष है। पिछले बीस वर्षों से मैं प्रीतम भवन नागपुर के पंजाबी महिला मंच की अध्यक्ष के रुप में कार्य कर रही हूँ। भगवान की कृपा से मैं पिछले बीस वर्षों से जिस ज्ञान और अध्यात्म की खोज कर रही थी वह खोज मेरी ब्रह्मर्षि सुभाष पत्रीजी की ध्यान साधना शिक्षा से पूरी हुई।

 

यह भी ईश्‍वर का ही संयोग है कि एक बार प्रीतम भवन नागपुर में ध्यान शिविर का आयोजन हुआ और संयोग से गुरुदेव पत्रीजी हमारे निवास स्थान पर रूकें और उन्होंने हमारे निवास स्थान पर ही ध्यान करने की क्रिया सिखाई। उस दिन से मेरी दिनचर्या में थोडा परिवर्तन महसूस हुआ, और फिर हुई उनकी विशेष कृपा जो हमारे शहर नागपुर के छापरू चौक के झाड़े भवन में उनके ध्यान केन्द्र का खुलना।

 

4-4-2008 अप्रैल माह का वो सुन्दर समां और आज का यह सुनहरा जीवन जो गुरुदेव पत्रीजी के प्रयास ने हमारे जीवन को सुखमय बनाया। ध्यान करने से मेरी कार्य क्षमता इतनी बढ़ गई है कि जो मैं चाहती हूँ वह कार्य हो जाता है। मैंने अपने घट में ही ईश्‍वर की झलक देखी है। अब में सभी को ध्यान करने की प्रेरणा देती हूँ और उसे करने का तरीका बताती हूँ। ध्यान एक ऐसी क्रिया है जिसके द्वारा मैंने परम नीरोग काया प्राप्त की है। मैं शुक्रगुजार हूँ जनार्दन बेटे की, जिसने मुझे माँ शिव बाबा कह कर सदा मेरा मान बढ़ाया है। धन्यवाद के पात्र हैं वो शिक्षक जो निष्काम भाव से आकर ध्यान केन्द्र में ध्यान के बारे में अपने-अपने तरीके से ध्यान करवाते हैं।

 

धन्य बढ़भागी हैं वो, जो ध्यान करते हैं। धन्य-धन्य-धन्य है सुभाष पत्रीजी गुरुदेव जिन्होंने सभी को यह पथ दिखलाया-प्रभु का अनुभव करवाया। अपने ही घट में ध्यान सबसे ऊँची अवस्था है आध्यात्मिक जीवन की। हमें सबको ध्यान के बारे में बताना हैं और उन्हें ध्यान करवाना है। हमारे पूर्ण नागपुर के भाग्य जागे जहाँ निःशुल्क ध्यान केन्द्र जो कि झाड़े भवन छापरु चौक में खुला और जिस दिन से यह ध्यान केन्द्र खुला है मैं रोज नियम से ध्यान कर रही हूँ। ध्यान में ऐसा महसूस होता है जैसे मेरी आत्मा शरीर से अलग होकर पहाड़ों, नदियों को पार कर गहरी गुफा, सुरंग की ओर बढ़ती चली जाती है। " चरेवेती " मतलब बढ़ते चलो, बढ़ते चलो ऐसी ही सुंदर गूँज मुझे ध्यान में अनुभव होती है।

 

मेरा मन शांत एकदम शांत होकर घंटों ध्यान में लगता है। ध्यान में एक चुम्बकीय शक्ति है जो मुझे ध्यान-केन्द्र की ओर खींचती है।

 

श्रीमति शीलप्रेम खुंगर
वर्धमाननगर (नागपुर)

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