" जीवन का लक्ष्य "

 

मेरा नाम शिव जैन है और मैं लुधियाना शहर से हूँ। 16 साल से बिज़नेस और मार्केटिंग हैड की हैसियत से मेरा काम के सिलसिले में भारत और विदेशों में दौरे लगते रहते हैं। मेरे पास जीवन की सभी सुख-सुविधायें उपलब्ध होने के बावजूद मेरे अन्दर बहुत सा तनाव, चिन्तायें और बेचैनी बनी रहती जिसके कारण मुझे शारीरिक तकलीफें रहने लगी।

 

इन्हीं कारणों से मेरा झुकाव योगा, प्राणायाम और ध्यान, की ओर अग्रसर हुआ। पिछले दो सालों से मेरी रूचि आध्यात्मिक किताबों को पढ़ने में होने लगी।

 

योगा और प्राणायाम से मेरे स्वास्थ्य में थोड़ा सा सुधार हुआ पर फिर भी कुछ कमी सी महसूस होती रहती। दिन के अन्त तक मैं बहुत थक जाता। मैंने अपने स्वयं के निरक्षण में पाया कि मैं हमेशा भूतकाल और भविष्य के बारे में सोचता रहता हूँ, बिज़नेस को कैसे बढ़ाना है, अधिक पैसे कमाने के बारे में, नए बंगले, बच्चों के भविष्य, लोगों के बारे में, परिस्थितियों के बारे में और क्या-क्या नहीं। यह विचार जोकि बिल्कुल व्यर्थ के थे मेरी सारी उर्जा को खत्म कर देते थे।

 

दूसरी ओर मैं कहता था कि जीवन में मेरा लक्ष्य खुशी को पाना है। एक दिन मेरे दिमाग में विचार कौंधा कि खुशी कुछ नहीं बल्कि मन की स्थिति है। अगर मैं खुशी पाना चाहता हूँ तो उसके लिए मैं आज भी खुश रह सकता हूँ। अगर मैं शान्त रहना चाहता हूँ तो उसके लिए मैं अभी ही शान्ति अनुभव कर सकता हूँ। मैं स्वयं ही अपने आप का उध्दार कर सकता हूँ कोई और नहीं।

 

तब मैंने अपना ध्यान, शान्त, खुश और तनावरहित रहने की प्रक्रिया कि ओर केन्द्रित किया। उस दौरान मेरा सम्पर्क पिरामिड स्पिरिचुअल सोसायटी से हुआ और मैंने जाना कि हम अपने आप को विचारहीन स्थिति में ले आयें तो हम तनाव और बेचैनी से दूर रह सकते है। प्रतिदिन के ध्यान से हम अधिक उर्जा शक्ति प्राप्त कर सकते हैं, जो हमें उचित लक्ष्य की ओर अग्रसर करता हैं।

 

एक दिन मैं अपनी पत्नी और बहन के साथ पिरामिड केयर सैन्टर लुधियाना में गया। वहाँ पर मैं रचना मैडम से मिला उन्होंने मुझे ध्यान के बारे में बताया और हमें 30 मिनट ध्यान करवाया। मुझे बहुत अच्छा लगा, रचना जी ने मुझे किताबें पढ़ने के लिए दी और ध्यान का अभ्यास लगातार करने के लिए कहा।

 

मैंने उनसे पत्रीजी के बारे में भी बहुत सुना और उनसे मिलने के लिए मैं बहुत उतावला होने लगा। एक दिन मेरा बिज़नेस टूर चेन्नेई और बैंगलूर का था। मैंने ‘मैत्रेय-बुध्दा पिरामिड’ के बारे में भी बहुत सुना था, तो मैंने सोचा इस मौके का फायदा उठाया जाए और वहाँ जाकर ध्यान किया जाए।

 

पिरामिड वैली में सत्या मैडम से मेरी मुलाकात हुई और उन्होंने मुझे पिरामिड वैली में एक दिन रहने का निमन्त्रण दिया। वहाँ पर श्री नायडू के साथ मैंने सुबह 3:00 से 6:00 बजे तक किंग्ज़ चैम्बर में बैठ कर ध्यान किया। यह मेरे लिए एक यादगार अनुभव था, मुझे बहुत से शारीरिक झटके लगे, जैसे कि भूचाल आ गया हो। बाद में मुझे पता चला कि यह सूक्ष्म शरीर के झटके थे। यह मेरे लिए पहला अनुभव था " सूक्ष्म शरीर यान " का।

 

मैंने अपनी बहन को फोन पर यह अनुभव सुनाया और इच्छा जताई कि अगर पत्रीजी से मुलाकात हो जाए तो और भी अच्छा है। मेरी बहन ने बताया कि पत्रीजी अगले दिन दिल्ली में होंगे। यह मेरे लिए बहुत ही अच्छी खबर थी, मैं भी अगले दिन दिल्ली पहुँच गया ।

 

मैं रात को 10:30 बजे पत्रीजी से मिला। उनका आभा मण्डल देखकर, उनकी वाणी सुनकर और उनका व्यक्तित्व देखकर मैं दंग रह गया। उन्होंने मुझसे बेंगलुरु पिरामिड में मेरे अनुभवों के बारे में सुना, फिर उन्होंने बाँसुरी बजाई और मुझे 15 मिनट का ध्यान करवाया। उन्होंने मुझे अपने पास बिठाया मेरे साथ बहुत सी बातें की। मैं उनकी सहजता, महानता और सरलता पर बहुत प्रभावित हुआ।

 

रविवार को सुबह 6:00 से 7:00 बजे एकता ध्यान होता है। पत्रीजी ने मुझे भी बुलाया। यह भी मेरे लिए एक अलग तरह का अनुभव था। मुझे अपने purpose of life के बारे में पता चला कि मेरा कार्य विश्‍व में ध्यान प्रसार करना है जिससे कि मानवता का कल्याण हो सके।

 

अगस्त में मुझे पत्रीजी के साथ अमरनाथ यात्रा करने का सौभाग्य मिला। वह यात्रा भी मेरे लिए बहुत लाभदायक रही। मैंने बहुत से महान मास्टर्स के साथ मुलाकात की, मुझे बहुत कुछ सीखने के लिए मिला। मेरी जो भी शंकाएँ थी वह सब हट गई और मुझे जीने की एक नई दिशा मिली। अगर कोई मुझसे मिलना चाहता है, ध्यान में लाभ लेना चाहता है, मैं हर वक्त उनके लिए उपलब्ध हूँ।

 

मेरे अनुसार लगातार ध्यान अभ्यास, चमत्कारिक अनुभव पाने की तीव्र इच्छा, सबुरी और साकारात्मक सोच, यह चार चीज़े हर एक आध्यात्मिक यात्री की रूहानी यात्रा में सहायक होगीं।

 

शिव जैन
लुधियाना

संपर्क : +91 9779885555

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