" ध्यान की कृपा "

 

मैं श्‍वेता शर्मा एक गृहिणी हूँ। मेरा जन्म खन्ना शहर में हुआ। वहीं से मैंने अपनी स्कूल कालेज शिक्षा करके मास्टर्स इन इक्नोमिक्स की डिग्री ली। फिर मेरी शादी लुधियाना के एक बहुत ही अच्छे परिवार में हुई। जिससे मुझे वह सब कुछ मिला जिसकी इच्छा हर लड़की व उसके माता-पिता को होती है। अब मेरी शादी को नौ वर्ष हो चुके हैं। मैं अपने जीवन से सन्तुष्ट हूँ। परन्तु कभी-कभी मन में यह प्रश्‍न आता क्या यही पाना मेरे जीवन का उद्‌देश्य है? तभी 21 दिसम्बर 2007 को मेरे जीवन में वह मोड़ आया जो कि मुझे मेरे प्रश्‍नों के उत्तरों की ओर लेकर जा रहा था। गुप्ता परिवार की सदस्य अन्जू जी ने मुझे ध्यान क्लास के बारे में बताया !

 

मैं उनके साथ ध्यान क्लास में गई, वहाँ रचना जी ने मुझे ध्यान करना सिखाया। हम ने 40 मिनट ध्यान किया। जिसका अनुभव मुझे बहुत ही शान्तिमय लगा !

 

रचना जी ने कहा कि यह आप 40 दिन करो। मुझे लगा कि 40 दिन रोज ध्यान के लिए समय निकालना मेरे लिए बहुत मुश्किल होगा। परन्तु ईश्‍वर की कृपा से मैं अपना 40 दिन का होमवर्क करने में सफल रही !

 

इन दिनों में मेरे जीवन में जो बदलाव आया है, उसे शायद एक आम गृहिणी करने की अपेक्षा नहीं कर सकती। पिछले चार वर्ष से मुझे गर्दन का दर्द और पिछले वर्ष से gastric problems थी। यह दोनों ही problems मेरी 15 दिनों में ही बिल्कुल खत्म हो गई। मैं अपने आप को अब अधिक फिट व ऊर्जा से भरा महसूस करती हूँ। ध्यान करने पर मुझे लगता है कि यह वहीं peace of mind है जिसकी मुझे तलाश थी। और मेरा मन खुशी से भर जाता है !

 

ध्यान वह माध्यम है जिससे हम परमात्मा से एकाकार होते हैं। साथ ही हम शारीरिक तौर पर भी एक दम फिट हो सकते हैं। तभी हम अपने से जुड़े हर कार्य को कुशलता से कर पाएगे। जीवन के इस पड़ाव पर ही हमें सबसे ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है, क्योंकि इस दौर में हमारे पास रुकने का समय नहीं होता, हमने ही अपना और अपने परिवार के आज और आने-वाले कल का निर्माण करना है !

 

अब तो मैं अपने खाली समय में केवल ध्यान ही करना चाहती हूँ। जैसे हम अपनी दिनचर्या में खाने, पीने, काम करने इत्यादि को महत्व देते है। वही ध्यान के लिए अवश्य कुछ समय निकालना चाहिए। आज के समय में बच्चों को तो अवश्य ही ध्यान करना चाहिए ताकि वह एकाग्र हो कर अपनी पढ़ाई कर सके और मानसिक व शारीरिक रूप में स्वस्थ हो सके !

 

मैं तो कहूँगी हमें अपनी सालगिरह व जन्मदिन ध्यान में मिल कर बैठ कर ही मनाना चाहिए। अगर इस कहावत का प्रयोग किया जाए तो गलत न होगा " हींग लगी न फिटकरी रंग चोखा ही चोखा " हम आध्यात्मिकता से भी जुड़ गए और शारीरिक रूप से भी स्वस्थ हो गए !

 

मैं ध्यान के इस श्रेष्ठतम पथ पर रखे अपने इस कदम के लिए ईश्‍वर को धन्यवाद देना चाहती हूँ जिसने मुझे ऐसा भाग्य दिया कि ध्यान मार्ग पर चल सकूँ और पत्रीजी का जिन्होने हमें ध्यान करने की इतनी सरल विधि बताई जिसे हर आम इन्सान कर सकता है। मैं अन्जू जी और रचना जी की बहुत-बहुत आभारी हूँ। जिन्होंने मुझे ध्यान मार्ग की ओर अग्रसर किया। मैं तो कहूंगी यह दोनों ही मेरी गुरु हैं। हमें गुरु नहीं ढूँढने पड़ते, गुरु ही हमें स्वयं ढूँढ लेते हैं !

 

मेरी ईश्‍वर से यही प्रार्थना है कि मैं इस ध्यान पथ पर सदैव चलती रहूँ और दूसरों को भी इसकी प्रेरणा देती रहूँ।

 

श्‍वेता शर्मा
संपर्क : +91 9988278784

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