पाइमा के कुछ सदस्यों से एक भेंटवार्ता 

 

मेरा नाम प्राणहिता है। मैं एक साँफ्टवेयर इंजीनियर हूँ। सन् 2004 से मैं पी.एस.एम. से जुड़ी हूँ। ध्यान साधना की प्रेरणा मुझे अपने भाई प्रदीप तथा प्रबोध से मिली। एक बार मैं साई बाबा के मंदिर गई थी जहाँ पाइमा ग्रुप के लोग युवाओं को ध्यान करना सिखा रहे थे। मैंने जब वहाँ ध्यान किया तो मुझे अनेक अनुभव हुए। इनसे प्रेरित होकर मैंने नियमित रूप से ध्यान करना आरम्भ कर दिया। मुझे विभिन्न मास्टर्स से संदेश मिलने लगे और उन पर अमल करने से आशातीत सफलताएँ भी। पहले मैं 2000 रुपए मासिक वेतने पर काम करती थी पर ध्यान में मुझे प्रेरणा मिली कि मुझे सत्यम् कम्प्यूटर्स में आवेदन करना चाहिए। मैनें ऐसा किया और तीन गुणा वेतन पर मुझे वहाँ जाँब मिल गया। वहाँ मुझे एक साथ तीन प्राँजेक्ट्स पर काम करना होता था जो काफी ज़िम्मेदारी का काम था। हर आधे घण्टे में मैं रुक कर पाँच मिनट ध्यान करती थी। तनाव कम हो जाता था और काम अच्छा हो जाता था। धीरे-धीरे मेरी कार्यप्रणाली बेहतर होने लगी। मेरा आत्म विश्‍वास भी बढ़ गया और साल भर के अन्दर ही मैं वोराइज़न्स कम्पनी में आ गई।

 

एक बार ध्यान करते हुए मैं गहन ध्यानावस्था में पहुँच गई। यह पूर्णतः शून्य की स्थिति थी, ब्रह्मानन्द का अनुभव हुआ। सुना तो ज़रूर था पर जब इसे महसूस किया तो बयान करने के लिए शब्दों की कमी पड़ गई। यह आनन्द कहीं बाहर से नहीं आया था, यह तो अन्तर्मन से ही निकला था। यह ध्यान साधना का ही परिणाम था। इस अनुभव के बाद मुझे लगा कि सभी तो इस आनन्द की तलाश में हैं, सबको ध्यान सिखाना चाहिए। मैंने तीन दिवसीय वर्कशॉप का आयोजन करना शुरु किया जिसमें गेहूँ-चावल जैसे नियमित अनाजों को छोड़कर, सलाद आदि का सेवन कराया गया। लगातार ध्यान करते रहने से अन्नहार की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। इसके साथ-साथ मैं positive affirmations भी देती रहती हूँ। ये affirmation जैसे ‘मैं पूर्णतः स्वस्थ और प्रसन्न हूँ।’ ‘मेरी आध्यात्मिक उन्नति हो रही है।’ ‘मेरे कर्मों का नाश हो रहा है।’ हमारे अवचेतन मन में अंकित हो जाती हैं और हमारे जीवन में घटित होने लगती हैं। हमारा अवचेतन मन बहुत सक्षम है – ‘Secret’ नाम की पुस्तक तथा फ़िल्म हमें इस शक्ति से परिचित कराती हैं। अब बहुत से लोग ऐसी वर्कशॉप कराते हैं।

 

मैं सभी को प्रकृति की ओर उन्मुख होने के लिए भी कहूँगी क्योंकि वह हमें बहुत कुछ सिखा सकती है। जब मैंने पहली बार वर्कशॉप की तो भोजनावकाश के दौरान मैंने देखा कि एक वरिष्ठ ध्यानी श्रीमती लता सीताफल के एक पेड़ की तरफ बड़े ध्यान से देखती जा रही हैं। पूछ्ने पर उन्होंने बताया कि यह पेड़ पिछ्ले पन्द्रह मिनट से मुझसे बातें कर रहा है। इस पेड़ में एक फल पूरी तरह पक गया है और गिरने वाला है। वह फल चाहता है कि हम उसे तोड़कर खाने में उपयोग कर लें। हमने जब उस फल को छुआ तो वह झट हाथ में आ गया। मैंने लता जी से कहा कि वे उस फल से सन्देश ले लें। इस पर उन्हें तुरन्त एक सुन्दर सा सन्देश मिला। फल ने उनसे कहा कि मैं जीवन का पूर्ण रस और ज्ञान पाकर पक चुका हूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरे अन्दर संचित ऊर्जा किसी के काम आए, मेरे टूट कर गिर जाने से व्यर्थ न हो जाए। लता जी को सन्देश मिल गया कि प्रत्येक मनुष्य को ध्यान में प्राप्त ज्ञान को अपने तक ही सीमित न रखकर सभी तक पहूँचाने की कोशिश करनी चाहिए। में सबसे प्रकृति से जुड़ने की बात कहती हूँ, वहीं से हमें ज्ञान मिल सकता है।

 

PYMA  ( PYRAMID YOUNG MASTERS ASSOCIATION) पी.एस.एस.एम. का एक wing है जिसके अन्तर्गत कई प्रोजेक्ट चलाए जाते हैं। जैसे Project Cool, Project  Kalanjali, Project Pyra आदि। प्रॉजेक्‍ट कूल ध्यान प्रचार का प्रॉज्क्‍ट है। इसमें पाइमा के सदस्य विभिन्न स्कूलों, कालेजों तथा कॉर्पोरेट ऑफिसों में जाकर ध्यान के विषय में बताते हैं। प्रॉजेक्ट कलांजलि के अन्तर्गत पाइमा सदस्य विभिन्न कलाओं को प्रोत्साहित करने का काम करते है। इसी के अन्तर्गत वे ध्यान यज्ञों में रंगारंग कार्यक्रम भी प्रस्तुत करते हैं जिससे युवाओं के भीतर छिपी प्रतिभाओं को बाहर निकल कर निखरने का मौका दिया जाता है। प्रॉजेक्‍ट पाइरा के अन्तर्गत हम बच्चों और युवाओं को पिरामिड बनाने का प्रशिक्षण देते है, इन्हें पिरामिड ऊर्जा के विषय में बताते हैं तथा घरों में पिरामिड बनाने में मदद करते हैं। पिरामिड के ढाँचे के कारण जो ऊर्जा एकत्र होती है उसका सही उपयोग करने के लिए हम पिरामिड आकार की विविध वस्तुएँ बनाते हैं जैसे पिरामिड कैप, स्टडी टेबल, कम्‍प्‍यूटर, की-चेन आदि। इस बार हमने पिरामिड आकार में चॉकलेट्स बनाई थी जो सबको पसन्द आईं।

 

हम लोग कई कार्पोरेट ऑफ़िसों में जाकर पिरामिड ऊर्जा तथा ध्यान की बात करते हैं सबको बताते हैं कि किस प्रकार ध्यान द्वारा stress से मुक्ति मिलती है। ध्यान का अर्थ है सम्‍पूर्ण जागरूकता (awareness) में रहना तथा वर्तमान के क्षण में जीना’ शाकाहार को प्रोत्साहन देने के लिए भी हम काम करते हैं, लोगों को शाकाहार लेने के प्रति जागरूक बनाते हैं। कई बार शाकाहार रैली भी की जाती है।

 

ध्यान हर व्यक्ति के लिए आवश्यक है। चाहे वह किसी भी वर्ग या जाति का हो, किसी भी उम्र का हो, स्त्री हो अथवा पुरुष। अपने काम से खाली होने पर समय का सदुपयोग करते हुए ध्यान करना चाहिए। ऐसे तो कहा जाता है कि खाली दिमाग शैतान का घर होता है पर इस प्रकार का खाली दिमाग वास्तव में खाली दिमाग न होकर नकारात्मक सोच से भरे दिमाग का दूसरा नाम है। हमें सचमुच दिमाग को विचारों से खाली करके शून्य स्थिति में आना है। तभी हम वैश्‍विक ऊर्जा से भर कर स्वस्थ, शांत व प्रसन्न रह पाएँगे और आत्मिक उन्नति कर सकेंगे। मन एक शराबी बन्दर जैसा है जिसे भूत चिपक गया है और जिसे बिच्छू ने डंक मारा है। एक तो बन्दर वैसे ही चंचला है, ऊपर से अगर वह शराब पी ले, भूत उसे चिपक जाए और बिच्छू के डंक से भी वह तड़प रहा हो तो उसकी क्या हालत होगी। ऎसे बन्दर मन को अगर खुला छोड़ दिया जाए तो जाने क्या होगा। निश्‍चय ही उसे साधना होगा, ध्यान ही वह एकमात्र रास्ता है जिस पर हमें चलना होगा। चित्त शांत होगा तो काम करने की शक्ति भी बढ़ेगी और सोच-विचार भी उन्नत होगा। आवश्यकता है ध्यान को अपनाने और फिर उसका प्रचार करने की। 

 

प्राणहिता
संपर्क :  +91 9908306876 

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