" ध्यान से जीवन पावन हुआ ! "

 

मेरा नाम प्रशांत जप्ती है। मेरे दादा और दादी माँ चिक्कोडी आये थे। " बुध्द पिरामिड ध्यान केन्द्र " का बोर्ड देखकर वे मुझसे कहने लगे कि हमें वहाँ ले चलो, हम को ध्यान सीखना है। ध्यान का नाम सुनकर मैं उनको टालता रहा। लेकिन उनके जोर देने से एक दिन जाना ही पड़ा।

 

2-10-2008 के दिन मैं उनको लेकर ध्यान केन्द्र पहुँचा। केन्द्र के संचालक प्रो.जीवन्धर केतप्पनवर ने हम सबको ध्यान के विधान, उसके प्रयोजन के बारे में बताकर ध्यान में बिठाया। मैं तो ध्यान नहीं करना चाहता था, फिर भी अनिवार्य रूप से दादा-दादी के साथ ध्यान करना पड़ा। सिर्फ एक-दो हफ्ते में ही मुझ में ध्यान की रूचि बढ़ गई। कभी बीच में ध्यान के लिए नहीं आता तो बहुत कुछ खोया-खोया सा लगता। मेरे दादा-दादी चालीस दिन के बाद गाँव वापस चले गए, पर मैं निरंतर ध्यान के लिए जाता रहा !

 

26/11 के दिन मुंबई में ताज होटेल पर हमले के कारण मुझे बहुत गुस्सा आया था। मेरी तड़प को देखकर सर ने कहा कि उसके परिहार के लिए Thought लेकर ध्यान करो। मैं बहुत उम्मीद से रात दस बजे से ग्यारह बजे तक ध्यान के लिए बैठा। " तब मेरा सूक्ष्म शरीर ताज हो्टेल की गोलीबारी की जगह पहुँच गया। मैंने देखा कि हमारे सारे कमांडो बहुत दबाव में थे, वहाँ बहुत गर्मी थी। हमारे कमांडो बहुत अंधाधुंध गोलीबारी का सामना कर रहे थे, कुछ कमांडों को समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें? अचानक वहाँ एक खिड़की से बहुत रोशनी आने लगी, मैंने वहाँ पर पहुँच कर देखा तो वहाँ एक श्‍वेत आत्मा ध्यानस्थ अवस्था में थी। वह आत्मा आग के बीचों बीच थी, फिर भी उसे कुछ नहीं हो रहा था। वह आत्मा शहीद एम.पी.शर्मा थे। वे इस से पहले मुंबई की सरणी विस्फोट में शामिल आतंकवादियों को गिरफ्तार करने गए थे। तब वहाँ पर हुई घमासान गोलीबारी में शहीद हुए थे। वह ध्यानस्थ आत्मा के साथ मैं भी ध्यान के लिए बैठ गया। हम दोनों की शक्ति से हमारे कमांडों की इतनी शक्ति और विश्‍वास बढ़ गया कि वे परिपूर्ण निर्णय के साथ आगे बढ़ने लगे। उसी समय आतंकवादियों का हौसला टूटने लगा और वे पागलों की तरह बर्ताव करने लगे।

 

अचानक मेरा सूक्ष्म शरीर ताज होटेल के बाहर के T.V Cameramen और Photographers के पास आया। तब मैंने देखा कि हो्टेल के Ground floor पर जोरदार आग लगी थी। हो्टेल की खिड़की से कुछ गिरता हुआ देखा। तभी हमारे कमांडों ने ‘Operation Black Tornado success' की विजय घोषणा की। " इस ध्यान के बाद रात ग्यारह बजे मैं सो गया। सुबह मेरी मम्मी ने मुझे यह कहते हुए उठाया कि " ताज " होटेल में आग बढ रही है, जल्दी उठो और देखने आओ। " वह घटना हूबहू मेरे ध्यान में मैंने जैसे देखा था, वैसा ही था। और वह खिड़की से गिरा व्यक्ति आतंकवादी था। कुछ देर में कमांडों से घोषणा हुई कि ‘Operation Black Tornado success' मुझे बहुत आश्‍चर्य हुआ। तुरंत मैं सर के पास गया और यह अनुभव सुनाया। यह अनुभव सुनकर उनको जो खुशी हुई उसका वर्णन मैं नहीं कर सकता।

 

जुलाई 15 2009 के दिन चिक्कोडी में ब्रह्मर्षि पत्री जी के ध्यान कार्यक्रम का आयोजन हुआ था, जिसकी सफलता के लिए हम सब को मिलकर काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, उन्होंने मुझे भी केतप्पनवर सर के जैसे बनने के लिए और दूसरों को तैयार करने के लिए प्रेरणा दी। P.S.S.M के ध्यान जगत के महा अभियान प्रेरणा स्रोत ब्रह्मर्षि पत्री जी को दिल से प्रणाम करता हूँ।

 

प्रशांत जप्ती
चिक्कोडी

संपर्क : +91 9379548104

Go to top