" जीवन परिवर्तन "

 

मैं सुनील जिंदल लुधियाना निवासी हूँ। मेरा जन्म पढ़े लिखे धार्मिक, सम्पन्न परिवार में हुआ। हम चार भाई बहन है, बचपन में मुझे बड़ा लाड़-प्यार मिला जिससे मैं थोड़ा जिद्दी हो गया था। मैं किसी की डाँट बर्दाश्त नहीं करता था। मेरे गुरु एस.पी.सूद मुझे बहुत समझाते। वह मेरा मार्ग दर्शन करते रहते। मेरा अध्यात्म की ओर बहुत झुकाव था। मैने श्री श्री हंस राज महाराज से दीक्षा ली | राम मंत्र जाप से मुझे बिना मांगे ही सब कुछ मिला। 15 साल से उनका शिष्य हूँ। मैनें हरिद्वार राम शरणम्‌ में साधना शिबिर में भाग लिया। वहाँ श्रीराजकुमार गुप्ता ने मुझे 10 मिनट ध्यान करवाया। उन्होंने कहा आप ने बहुत मंत्र जाप करके देख लिया अब ध्यान करके देखिए। ध्यान में मेरे कान में अत्यन्त दर्द उठा। जब मैं ध्यान से उठा तब सारा दर्द ठीक हो गया। बचपन से ही मुझे कान की तकलीफ थी। बहुत सी दवाईयाँ खाईं और कान में डाली भी पर फिर भी आराम नहीं मिला। ध्यान की पहली बैठक में ही मुझे आराम मिल गया। यहाँ से मुझे ध्यान पर विश्‍वास हो गया कि मुझे शारीरिक आरोग्यता ध्यान से ही मिलेगी।

 

19 जून 2006 यह दिन मेरी जिन्दगी का यादगार दिन है। मैं श्री राजकुमार गुप्ता और रचना जी के घर गया जहाँ उन्होंने मुझे ब्रह्मर्षि पत्रीजी से मिलाया। उन्होंने हम सबको सारी रात ध्यान करवाया। उस दिन पूर्णिमा की रात थी। मुझे इतनी ऊर्जा और हल्कापन कभी पहले महसूस नहीं हुआ था। मुझे एहसास हुआ कि सब कुछ अपने अन्दर है। अच्छाई-बुराई, बीमारी-दवाई, इत्यादि। हम अपनी जिन्दगी के गुरु स्वयं ही हैं, हम अपने डाक्टर स्वयं ही हैं। हम जैसे चाहे अपनी जिन्दगी को रूप दे सकते है।

 

अगली बार मार्च में पत्रीजी लुधियाना आये। मैं उन्हें अपने घर ले गया। उन्होंने मुझे वहाँ पिरामिड ध्यान केन्द्र बनाने का आदेश दिया। रचना मैडम ने मुझे प्रोत्साहित किया ओर हमने मिल जुल कर 4 जून 2007 को श्री एस.के.राजन और मैडम गिरिजा राजन से निःशुल्क ध्यान केन्द्र का उद्‌घाटन करवाया। तब से आज तक यहाँ हजारों लोग ध्यान सीखने आ चुके हैं और अपने-अपने शहरों में जा कर ध्यान केन्द्र खोल रहे हैं।

 

अगस्त 2007 में पत्रीजी के आदेश से मैं श्री राजकुमार जी की टीम में शामिल होकर अमरनाथ यात्रा पर ध्यान के शिविर पहलगाँव मे भाग लिया। वहाँ हमने हजारों यात्रियों को तुरन्त ध्यानी बनाया। मुझे ध्यान करने और करवाने में बहुत आत्म सन्तुष्टि मिल रही है, मेरा इस जीवन में आना सार्थक हो गया है। दूसरों को सही मार्ग दिखाने में जो सकून मिलता है ! वह मुझे पिरामिड सोसायटी में आ कर पता चला है।

 

श्री ब्रह्मर्षि पत्रीजी के मार्गदर्शन से हम जीवन भर उनका संदेश लोगों तक पहुँचाते रहेंगे।

 

सुनील जिंदल
लुधियाना

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