" ध्यान केन्द्र ने सूदभवन को परिपूर्ण बना दिया है ... " 

 

मैं सुरेन्द्र सूद हूँ। चण्ड़ीगढ़ में रहता हूँ। सेक्टर 44 में स्थापित सूद बिरादरी की संस्था ‘सूदसभा’ का जनरल सेक्रेटरी हूँ। यह पद संभालते हुए मुझे। वर्ष हो गए हैं। इससे पूर्व मैं भारतीय बिमा निगम में कार्यरत था। सामान्यतः सर्विस में रहने वाले लोग इस दुविधा में फँस जाते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद अब वे क्या करें जबकि स्वास्थ्य भी बिल्कुल ठीक होता है। परन्तु मैं इस दुविधा में पड़ने से बच गया क्योंकि सेवानिवृत्ति से पूर्व ही मैं सूदसभा के जनहितकारी कामों में व्यस्त था। मुझे सभा का जनरल सेक्रेटरी भी चुन लिया गया और मैं लगातार काम में लगा रहा। अब न कोई समय का बन्धन था, न ही घर से कहीं बहुत दूर जाना था। 

 

सुद सभा के दो भवन हैं- एक चण्डीगढ़ में और एक पंचकूला में। 2002 में प्रधान सचिव बनने के समय चण्डीगढ़ के भवन में तीसरी मंज़िल का निर्माण कार्य चल रहा था - एक तो उस ओर ध्यान आकर्षित हो गया और उसके साथ ही वहाँ जनहितकारी गतिविधियों को शुरू करना भी मुझे आवश्यक लगा। तब 2003 में वहाँ चेरिटेबल डायग्नॉस्टिक लेबोरेट्री स्थापित की गई और निःशुल्क परामर्श देने के लिए पी. जी आई से सेवानिवृत्त Dr. राजेन्द्र कालरा और जनरल हॉस्पिटल से सेवानिवृत्त Dr. जे. के कालरा की सेवाएँ भी हमें प्राप्त हो गईं। इसके साथ ही एक फ़ीजियोथेरेपी लैब तथा होमियोपैथिक डिस्पेंसरी भी वहाँ खोली गई। Dr. सुखबीर चोपड़ा होमियोपैथिक क्लिनिक की देखरेख करती हैं और असंख्य मरीज़ उनके पास आते हैं। इसी प्रकार वहाँ एक नेत्र विशेषज्ञ तथा रेकी मास्टर भी नियमित रूप से आते हैं। 

 

मेरा जीवन पहले की तरह ही व्यस्त था। परिवार में सब कुछ खुशहाल था, बच्चे भी विवाहोपरान्त अपने - अपने घरों में सुखी व संपन्न थे। कभी - कभी हम दोनों भी उनके पास कुछ दिन मिलने चले जाया करते थे पर अचानक जीवन की गाड़ी पटरी से हिल गई मुझे अपनी पसलियों में दर्द होना शुरू हो गया। हर प्रकार की जाँच कराई - स्कैन, एक्सरे तथा बोन मैरो टेस्ट आदि और जो पता चला उसके इलाज के लिए मुझे पी. जी. आई. जाना पड़ा। डाक्टरों ने बताया कि मुझे Multiple myeloma (एक प्रकार कैंसर) है। इसना पूरी तरह उपचार संभव नहीं है पर हाँ दवाइयों के लेते रहने से इसे नियन्त्रण में रख पाना अवश्य संभव है। यह सूचना मेरे और मेरे परिवार के लिए वज्रपात से कम नहीं थी पर ईश्वर की कृपा से कुछ खास मित्रों व शुभचिन्तकों ने हमारा साथ दिया, हमने भी हिम्मत को बाँध कर रखा। धैर्य के साथ उपचार भी करते रहे, अच्छी पुस्तकों का अध्ययन हम पहले भी करते आ रहे थे जिससे बहुत मदद मिली। इसके बावजूद एक अनजाना सा भय हर समय मँडराता रहता, कभी लगता ज़िन्दगी एक दिशाविहीन किश्ती की तरह हो गई है जिसे हालात के थपेड़े न जाने किधर ले जाएँगे।

 

उन्हीं दिनों Dr. जे. के कालरा श्री रामा राजू को लेकर मेरे घर पर आए। इन्हीं से ध्यान विधि सीखकर उन्होंने खुद भी मेडिटेशन की ओर अपनी जीवन - धारा को मोड़ दिया था। मेरी स्थिति वे जानते थे और मुझे उस तकलीफ़ से बाहर निकालने के लिए मुझे भी ध्यान मार्ग पर प्रवृत्त करना चाहते थे। जीवन में चमत्कार तो होते रहते हैं, कौन जाने मेरा जीवन भी संभल जाए। इस आशा व सद्‌भावना के साथ उन्होंने मुझे और मेरी पत्नी को ध्यान करना सिखाया। पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज़ मूवमेंट के बारे में बताया, पत्री जी के महान्‌ कार्यों के बारे में बताया और पिरामिड शक्ति के प्रभाव से भी परिचित कराया। मुझे बहुत अच्छा लगा। अभी तक मैंने मेडिटेशन के बारे में पढ़ा तो था पर अब उसके बारे में और जानने की उत्सुकता बढ़ गई। मैंने इंटरनेट से मेडिटेशन के बारे में जितनी जानकारी मिल पाई, मैंने एकत्र की। यह निश्चय भी किया कि मुझे हर ओर भागने की ज़रूरत नहीं है, एक ही ध्यान प्रक्रिया को अपनाना होगा। अन्यथा मेरी स्थिति उस यात्री जैसी हो जाएगी जिसे अपनी मंज़िल का तो पता होगा पर सही मार्ग की जानकारी के अभाव में वह भटक जायेगा। शायद इसीलिए नियति ने मेरे मार्गदर्शक तो घर पर ही भेज दिए थे। 

 

मैंने Dr. कालरा के घर पर हर रविवार को होने वाले ग्रुप मेडिटेशन में जाना शुरू कर दिया। सौभाग्य से तभी पत्री जी का चण्डीगढ़ में आना हुआ और सूद भवन के हॉल में उनका पहला प्रोग्राम हुआ। अपनी सहज शैली में उन्होंने मेडिटेशन, शाकाहार और पिरामिड के बारे में बाताया। ध्यान भी कराया और बीच में बाँसुरी - वादन भी किया। उस समय एक रूहानियत का अहसास हुआ, मुझे लगा जैसे मेरे सभी विकार शरीर से बाहर निकल रहे हैं और शरीर हल्का हो रहा है। महसूस हुआ मानों अब कोई रोग रहा ही नहीं है। यह एक विलक्षण अनुभव था। 

 

आदरणी य पत्री जी की यह यात्रा पूर्णतया सफल रही क्योंकि सूद भवन में चल रही गतिविधियों मे एक और अध्याय जुड़ने जा रहा था। ध्यान के विलक्षण प्रभाव तथा Dr. कालरा की सेंटर स्थापित करने की अदम्य इच्छा ने मुझे यह विचार दिया कि क्यों न हम अपने ही एक हॉल में मेडिटेशन सेंटर बनाएँ। सूदसभा की मैनेजिंग कमेटी ने मेरे इस प्रस्ताव का स्वागत किया और समस्त शहरवासियों के लिए हमारे भवन में पहला मेडिटेशन सेंटर व लायब्रेरी स्थापित हुई। चंडीगढ़ पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटी की ओर से उस हॉल में दस पिरामिड लगवाए गए और रोज़ शाम को एक घंटे के लिए वहाँ ध्यान होना शुरू हो गया। सूद सभा की ओर से जो सुविधाएँ आवश्यक थीं, प्रदान की गईं। वहाँ audio system, air conditioner, कुर्सियाँ, पानी आदि की व्यवस्था की गई और लायब्रेरी में बहुत सी किताबें भी रखी गईं। 19 जुलाई 2009 को इस केंद्र का उद्‌घाटन हुआ ओर एक बड़ा समारोह आयोजित किया गया। इस ध्यान केंद्र के संचालन के लिए स्वयं Dr. कालरा ने पूरा दायित्व अपने ऊपर लिया। उनकी नियमित उपस्थिति के कारण यह सेंटर सफलतापूर्वक चल रहा है। बहुत से लोग यहाँ रोज आते हैं, ध्यानविधि सीखते हैं और ग्रुप मेडिटेशन करते हैं। समय समय पर सीनियर मास्टर्स यहाँ आते रहते हैं, उनके सेशन बहुत ज्ञानवर्ध्दक होते हैं। कई बार वर्कशॉप भी होती हैं, पूर्णिमा पर तीन घंटे का ध्यान होता है, कभी guided meditation का सेशन होता है। समय समय पर ध्यानी लोग अपने अपने तरीके से यहाँ अनेक विषयों पर चर्चाएँ भी करते रहते हैं ओर आध्यात्मिक विषयों पर लेक्चर भी होते हैं। सूदभवन चण्डीगढ़ के इस केन्द्र में आने वाले लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए हम पंचकूला में भी ऐसा ही केंद्र खोलने की योजना पर विचार कर रहे हैं। 

 

ध्यान केंद्र की स्थापना के बाद सूद भवन में नई ऊर्जा का संचार हुआ है, यहाँ की निरंतर बढ़ती ऊर्जा के कारण हमारा भवन एक नया रूप ले चुका है, यह कहना अतिशयोक्ति न होगा कि कायाकल्प ही हो गया है। इतने लोग रोज़ यहाँ ध्यान करते हैं और पिरामिडों की ऊर्जा निरंतर बनी रहती है। सूदभवन ने थोडे समय में बहुत तरक्की की है, यहाँ एक पॉज़िटिव ऊर्जा रहती है और सामाजिक गतिविधियाँ चलती रहती हैं। मेरे निजी जीवन पर भी ध्यान से बहुत लाभकारी प्रभाव पड़ा है। मैं अब बिल्कुल नॉर्मल हूँ, दवाइयाँ अवश्य ले रहा हूँ पर ब्रह्मर्षि पत्री जी के आशीर्वाद के कारण मुझे कभी ऐसा नहीं लगता कि मुझे कोई ऐसा असाध्य रोग है। कितने ही लोग यहाँ ध्यान करने से अपने डिप्रेशन से बाहर आए है। ध्यान केंद्र की स्थापना हमारे सूदभवन के समाजसेवा के लक्ष्य को पाने में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बहुत से लोग लाभान्वित हो रहे है। हमारी सभा के कई सदस्य भी यहाँ आते हैं, निश्चय ही यह प्रॉजेक्ट सभी के लिए शुभ फलदायी साबित हुआ है।

 

सुरेन्द्र सूद
चण्डीगढ़
संपर्क : +91 9988019198

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